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फेफड़ों पर धूम्रपान का असर

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फेफड़ों पर धूम्रपान का असर

फेफड़ों पर धूम्रपान का असर

धूम्रपान दुनिया भर में फेफड़ों को नुकसान और सांस की बीमारियों के मुख्य कारणों में से...

अवलोकन

धूम्रपान दुनिया भर में फेफड़ों को नुकसान और सांस की बीमारियों के मुख्य कारणों में से एक है। फेफड़े सीधे सिगरेट के धुएं में मौजूद हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आते हैं, जिससे तुरंत जलन और लंबे समय तक नुकसान होता है। धूम्रपान फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है, यह समझना रोकथाम और जल्दी छोड़ने के महत्व को बताता है।

फेफड़ों के टिशू को नुकसान (Damage to Lung Tissue)

सिगरेट के धुएं में हजारों जहरीले केमिकल्स होते हैं जो फेफड़ों के टिशू को नुकसान पहुंचाते हैं। ये पदार्थ सांस की नली में जलन पैदा करते हैं और ऑक्सीजन के आदान-प्रदान के लिए जिम्मेदार नाजुक हवा की थैलियों को नष्ट कर देते हैं। समय के साथ, यह नुकसान फेफड़ों की क्षमता को कम कर देता है और हल्की शारीरिक गतिविधि के दौरान भी सांस लेना मुश्किल बना देता है।

पुरानी खांसी और ज़्यादा बलगम (Chronic Cough and Excess Mucus)

धूम्रपान सांस की नली में ज़्यादा बलगम बनने को बढ़ावा देता है। साथ ही, यह फेफड़ों से बलगम साफ करने वाली छोटी बालों जैसी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे पुरानी खांसी, सीने में जकड़न और बार-बार गला साफ करने की आदत होती है, जिसे आमतौर पर स्मोकर्स कफ के नाम से जाना जाता है।

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का खतरा बढ़ना (Increased Risk of Chronic Obstructive Pulmonary Disease)

धूम्रपान क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का मुख्य कारण है, जिसमें क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फीसीमा शामिल हैं। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस में, सांस की नली में सूजन रहती है और बलगम भरा रहता है। एम्फीसीमा में, हवा की थैलियां नष्ट हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का अवशोषण कम हो जाता है। COPD लगातार सांस फूलने और जीवन की गुणवत्ता में कमी का कारण बनता है।

फेफड़ों के इन्फेक्शन का खतरा ज़्यादा (Higher Susceptibility to Lung Infections)

धूम्रपान फेफड़ों की इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। इससे धूम्रपान करने वालों को ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और टीबी जैसे इन्फेक्शन होने का खतरा ज़्यादा होता है। धूम्रपान करने वालों में इन्फेक्शन ज़्यादा गंभीर होते हैं और ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है।

फेफड़ों के कैंसर का खतरा (Lung Cancer Risk)

फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। धुएं में मौजूद हानिकारक केमिकल्स फेफड़ों की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि होती है। फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती चरणों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जिससे यह और भी खतरनाक हो जाता है। लगातार खांसी, सीने में दर्द, वजन कम होना और खून की खांसी इसके चेतावनी संकेत हैं।

List of Tests Used to Detect Lung Diseases

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़े ठीक हो सकते हैं?

हां। छोड़ने के बाद समय के साथ फेफड़ों का काम बेहतर होता है, हालांकि कुछ नुकसान स्थायी हो सकता है।

क्या कभी-कभी धूम्रपान करने से फेफड़ों को नुकसान होता है?

कभी-कभी धूम्रपान करने से भी फेफड़ों में जलन होती है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं।

धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़ों को ठीक होने में कितना समय लगता है?

सुधार कुछ हफ्तों में शुरू हो जाता है, और महीनों से लेकर सालों तक लगातार रिकवरी होती रहती है।